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नामकरण मुहूर्त 2026

नामकरण (शिशु नामकरण संस्कार) हिंदू परंपरा के सोलह संस्कारों में से एक है। यह सामान्यतः जन्म के 11वें या 12वें दिन किया जाता है। संस्कार में शिशु का नाम उनके जन्म नक्षत्र और राशि के आधार पर रखा जाता है।

तिथि, नक्षत्र और शुभ समय देखें

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मुहूर्त देखें

मुहूर्त चुनते समय क्या देखें?

1.

समय: नामकरण परंपरागत रूप से जन्म के 11वें या 12वें दिन, या बाद में किसी सुविधाजनक शुभ दिन किया जाता है।

2.

नक्षत्र: पुष्य, रोहिणी, हस्त, उत्तर फाल्गुनी और उत्तराषाढ़ा नामकरण के लिए शुभ माने जाते हैं।

3.

वार: गुरुवार (गुरु) नामकरण संस्कार के लिए परंपरागत रूप से सर्वाधिक पसंदीदा दिन है।

4.

नाम शिशु के जन्म नक्षत्र (राशि अक्षर) के अनुसार पहले अक्षर के आधार पर चुना जाता है।

5.

वर्जित: संस्कार के लिए भद्रा, राहु काल और जन्म के पहले तीन दिनों से बचें।

6.

पिता या परिवार के बुजुर्ग परंपरागत रूप से सबसे पहले शिशु के दाएं कान में नाम फुसफुसाते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या नामकरण 12वें दिन के बाद भी हो सकता है?

हाँ, अगर 11वाँ या 12वाँ दिन अशुभ हो, तो संस्कार बाद की किसी शुभ तिथि पर किया जा सकता है। परंपरा से परे कोई सख्त समय-सीमा नहीं है।

नाम के लिए राशि अक्षर कैसे निर्धारित होता है?

राशि अक्षर जन्म के समय नक्षत्र से निर्धारित होता है। उदाहरण के लिए, रोहिणी नक्षत्र में जन्मे बच्चे के नाम का पहला अक्षर ओ, वा, वि या वे होगा।

क्या नामकरण के लिए पंडित जरूरी है?

परंपरागत रूप से हाँ, पंडित नामकरण पूजा करते हैं। हालांकि, आज कई परिवार परिवार के बुजुर्गों के साथ सरलीकृत संस्कार करते हैं। मुख्य क्षण वह है जब नाम पहली बार औपचारिक रूप से बोला जाता है।

क्या नामकरण के नाम के लिए Baby Name Finder उपयोग हो सकता है?

हाँ! हमारा Baby Name Finder आपको राशि के अनुसार फ़िल्टर करने देता है, जो आपको बच्चे के राशि अक्षर से मेल खाते नाम और उनके अर्थ खोजने में मदद करता है।

अस्वीकरण: यह जानकारी पंचांग डेटा और पारंपरिक गणनाओं पर आधारित है। महत्वपूर्ण संस्कारों के लिए कृपया किसी योग्य पंडित से परामर्श अवश्य लें।