विवाह मुहूर्त 2026
विवाह हिंदू परंपरा में सबसे पवित्र संस्कारों में से एक है। शुभ मुहूर्त चुनना यह सुनिश्चित करता है कि समारोह अनुकूल ग्रह स्थितियों के साथ संरेखित हो। मुख्य कारकों में तिथि, नक्षत्र, वार और राहु काल की अनुपस्थिति शामिल हैं।
तिथि, नक्षत्र और शुभ समय देखें
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मुहूर्त चुनते समय क्या देखें?
नक्षत्र: रोहिणी, मृगशिरा, हस्त, उत्तर फाल्गुनी और उत्तराषाढ़ा विवाह के लिए सर्वाधिक शुभ माने जाते हैं।
तिथि: तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, द्वादशी और पूर्णिमा सामान्यतः अनुकूल हैं।
वर्जित: अमावस्या, चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी और एकादशी विवाह के लिए उचित नहीं।
वार: सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार परंपरागत रूप से विवाह के लिए पसंद किए जाते हैं।
राहु काल: मुख्य फेरे या अनुष्ठान राहु काल में न करें।
लग्न: विवाह लग्न पर पाप ग्रहों का प्रभाव नहीं होना चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
विवाह के लिए मुहूर्त क्यों जरूरी है?
शुभ मुहूर्त समारोह को अनुकूल ग्रह स्थितियों के साथ संरेखित करता है, जो हिंदू परंपरा में जोड़े को सुखी और दीर्घायु विवाह का आशीर्वाद देता है।
विवाह के लिए कौन सा नक्षत्र सर्वोत्तम है?
रोहिणी और उत्तर फाल्गुनी विवाह के लिए सबसे शुभ नक्षत्र माने जाते हैं। मृगशिरा, हस्त और उत्तराषाढ़ा भी बहुत अनुकूल हैं।
अक्षय तृतीया विशेष क्यों है?
अक्षय तृतीया (अखा तीज) स्वयंसिद्ध मुहूर्त है — इस दिन अलग से मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं। इस दिन किया गया विवाह स्वतः शुभ माना जाता है।
मुहूर्त तय करने के बाद वेन्यू कितनी जल्दी बुक करें?
पंडित द्वारा मुहूर्त की पुष्टि होते ही वेन्यू बुक कर लें क्योंकि लोकप्रिय तिथियाँ जल्दी भर जाती हैं, विशेष रूप से नवंबर–फरवरी विवाह सीज़न में।
अस्वीकरण: यह जानकारी पंचांग डेटा और पारंपरिक गणनाओं पर आधारित है। महत्वपूर्ण संस्कारों के लिए कृपया किसी योग्य पंडित से परामर्श अवश्य लें।
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