
वरमहालक्ष्मी व्रतम 2026: देवी लक्ष्मी का शुक्रवार व्रत
वरमहालक्ष्मी व्रतम (वरलक्ष्मी व्रतम) दक्षिण भारत में महिलाओं का सबसे महत्वपूर्ण व्रत है, जो श्रावण पूर्णिमा से पहले दूसरे शुक्रवार को मनाया जाता है। 2026 में यह अगस्त में अपेक्षित है।
अगस्त 2026 (श्रावण पूर्णिमा से पहले दूसरा शुक्रवार) · सटीक तिथि अपडेट होगी · सत्यापित क्षेत्रीय डेटावरमहालक्ष्मी व्रतम
✓ सत्यापित क्षेत्रीय डेटावरमहालक्ष्मी व्रतम 2026
अगस्त 2026 (श्रावण पूर्णिमा से पहले दूसरा शुक्रवार)
देवी
वरमहालक्ष्मी — देवी लक्ष्मी का स्वरूप
राज्य
कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु
वरमहालक्ष्मी व्रतम के बारे में
वरमहालक्ष्मी व्रतम सुहागन महिलाएं पति और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए करती हैं। यह व्रत अष्टलक्ष्मी की पूजा के समान फलदायी माना जाता है।
वरमहालक्ष्मी व्रत कथा
कुंडिना नगर में चारुमती नाम की एक परम भक्त पत्नी थी। देवी महालक्ष्मी ने स्वप्न में आकर श्रावण पूर्णिमा से पहले दूसरे शुक्रवार को व्रत करने का निर्देश दिया।
चारुमती ने विधिपूर्वक व्रत किया और देवी की कृपा से उसे धन, सुख और सौभाग्य प्राप्त हुआ। उसकी समृद्धि देखकर पड़ोसी भी यह व्रत करने लगे।
✦अष्टलक्ष्मी के समान
वरमहालक्ष्मी व्रतम करने से अष्टलक्ष्मी के सभी रूपों की पूजा का फल मिलता है।
व्रत विधि
तैयारी (एक दिन पहले)
घर साफ करें, कोलम बनाएं, पूजा सामग्री एकत्र करें।
संकल्प
प्रातःकाल स्नान, नया वस्त्र, तुलसी-कुमकुम लगाएं और व्रत का संकल्प लें।
कलश पूजा
जल से भरे कलश पर नारियल और गहने रखें — यही वरमहालक्ष्मी का स्वरूप है। षोडशोपचार पूजा करें।
व्रत कथा और आरती
चारुमती की कथा पढ़ें, अन्य सुहागनों के मंगलसूत्र और चूड़ियां कलश के पास रखें।
प्रसाद और व्रत तोड़ना
संध्या पूजा के बाद प्रसाद वितरित करें और व्रत तोड़ें।
व्रतम प्रसाद
प्रसाद
- •चक्र पोंगल (मीठी खिचड़ी)
- •पुलिहोरा (इमली चावल)
- •नारियल चावल
- •फल
- •सुंदल
ℹ️ व्यंजन और परंपराएं क्षेत्र के अनुसार भिन्न हो सकती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
स्रोत विवरण
डेटा स्रोत
हिंदू चंद्र सौर पंचांग — श्रावण पूर्णिमा से पहले दूसरा शुक्रवार · सत्यापित स्रोत
संपादकीय समीक्षा
6 जून 2026
सत्यापन स्थिति
सत्यापित क्षेत्रीय डेटा
क्षेत्र / स्थान
कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु
